शनिवार, 4 दिसंबर 2010

वास्तु के अनुसार घर की निम्न बातों का ध्यान रखें

वास्तु के अनुसार घर की निम्न बातों का ध्यान रखें

घर के प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक अथवा '' की आकृति लगाने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

समृद्धि की प्राप्ति के लिए नार्थ-ईस्ट दिशा में पानी का कलश अवश्य रखना चाहिए।

वास्तु के अनुसार रसोईघर में देवस्थान नहीं होना चाहिए।

घर में देवस्थान की दीवार से शौचालय की दीवार का संपर्क नहीं होना चाहिए।

भवन में प्रवेश करते समय सामने की तरफ शौचालय अथवा रसोईघर नहीं होना चाहिए. यदि शौचालय है तो उसका दरवाजा सदैव बन्द रखें और दरवाजे पर एक दर्पण लगा दें. यदि द्वार के सामने रसोई है तो उसके दरवाजे के बाहर अपने इष्टदेव अथवा ॐ की कोई तस्वीर लगा दें.

आपके भवन में जो जल के स्त्रोत्र हैं, जैसे नलकूप, हौज इत्यादि, तो उसके पास गमले में एक तुलसी का पौधा अवश्य लगाएं.

पति-पत्नी में आपस में वैमनस्यता का एक कारण सही दिशा में शयनकक्ष का न होना भी है। अगर दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में स्थित कोने में बने कमरों में आपकी आवास व्यवस्था नहीं है तो प्रेम संबंध अच्छे के बजाए, कटुता भरे हो जाते हैं।

यद्यपि गृहस्थ जीवन में या व्याहारिक जीवन में कोई भी छोटा सा कारण एक बड़े कारण में परिवर्तित हो जाता है। चाहे वह आर्थिक हो या घर के अन्य सदस्यों को लेकर हो। इसका सीधा प्रभाव पति-पत्नी के आपसी संबंधों पर पड़ता है। इसलिए घर का वातावरण ऐसा होना चाहिए कि ऋणात्मक शक्तियां कम तथा सकारात्मक शक्तियां अधिक क्रियाशील हों। यह सब वास्तु के द्वारा ही संभव हो सकता है।

घर के अंदर यदि रसोई सही दिशा में नहीं है तो ऐसी अवस्था में पति-पत्नी के विचार कभी नहीं मिलेंगे। रिश्तों में कड़वाहट दिनों-दिन बढ़ेगी। कारण अग्नि का कहीं ओर जलना। रसोई घर की सही दिशा है आग्नेय कोण। अगर आग्नेय दिशा में संभव नहीं है तो अन्य वैकल्पिक दिशाएं हैं। आग्नेय एवं दक्षिण के बीच, आग्नेय एवं पूर्व के बीच, वायव्य एवं उत्तर के बीच।

घर के अंदर उत्तर-पूर्व दिशाओं के कोने के कक्ष में अगर शौचालय है तो पति-पत्नी का जीवन बड़ा अशांत रहता है। आर्थिक संकट व संतान सुख में कमी आती है। इसलिए शौचालय हटा देना ही उचित है। अगर हटाना संभव न हो तो शीशे के एक बर्तन में समुद्री नमक रखें। यह अगर सील जाए तो बदल दें। अगर यह संभव न हो तो मिट्टी के एक बर्तन में सेंधा नमक डालकर रखें |

अत: यदि हम अपने वैवाहिक जीवन को सुखद एवं समृद्ध बनाना चाहते हैं और अपेक्षा करते हैं कि जीवन के सुंदर स्वप्न को साकार कर सकें। इसके लिए पूर्ण निष्ठा एवं श्रद्धा से वास्तु के उपायों को अपनाकर अपने जीवन में खुशहाली लाएं।

जिस घर में किचन के अंदर ही स्टोर हो, तो गृहस्वामी को अपनी नौकरी या व्यापार में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन कठिनाइयों से बचाव के लिए किचन व स्टोर रूम अलग-अलग बनाने चाहिए।

अनुभव में पाया गया है कि जिनके घरों में किचन में भोजन बनाने के साधन जैसे गैस, स्टोव, माइक्रोवेव ओवन इत्यादि एक से अधिक होते हैं, उनमें आय के साधन भी एक से अधिक होते हैं। ऐसे परिवार के सभी सदस्यों को कम से कम एक समय भोजन साथ मिलकर करना चाहिए। ऐसा करने से आपसी संबंध मजबूत होते हैं तथा साथ मिलकर रहने की भावना भी बलवती होती है ।

जिस घर में किचन मुख्य द्वार से जुड़ा हो, वहां प्रारंभ में पति-पत्नी के मध्य बहुत प्रेम रहता है घर का वातावरण भी सौहार्दपूर्ण रहता है, किन्तु कुछ समय बाद बिना कारण आपस में मतभेद पैदा होने लगते हैं।

राहु अनैतिक सम्बन्धों एवं भौतिक वादी विचार धाराओं के निर्माण कर्ता माना गया है। इसलिए काले रंग को कभी भी बैडरूम (शयनकक्ष) में नहीं कराना चाहिए। काले रंग की वस्तुऐं भी नहीं रखनी चाहिए, मधुमेह जैसी बीमारियों का जन्म इस कारण होता है।

पीला रंग बृहस्पति का होता है और शुक्र कामदेव तथा भौतिक वादी विचार धाराओं का ग्रह है। पीले रंग के द्वारा शयन कक्ष में दो वर्गों के गुरूओं का द्ववन्द है। देवताओं के गुरू वृहस्पति और राक्षसों के गुरू शुक्र देव है, इन दोनों के कारण परिवारिक सुख में बाधाएं उत्पन्न होती हैं।

शनि की दिशा पश्चिम मानी गई है। भवन के पश्चिम में बैडरूम बनवाया जाये तो शुक्र-शनि से पीड़ित रहता है। शनि कुटिल होता है और ऐसे स्थानों (भवनों) में अवैधानिक कार्य ज्यादा होते हैं।

यदि उपरोक्त नियमों का पालन किया जाये तो मनुष्य ग्रहों के आपसी झगड़ों से बच सकता है। अन्यथा समय-समय पर जिस भी ग्रह कि स्थिति गोचर में या कुन्डली में कमजोर होगी तो वह अपने रंग दिखायेगा और जब मजबूत होगी तो वह अपने रंग और अधिक दिखायेगा।

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